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mahabharat 5.117.21: धर्मात्मा राजा दिवोदास अपने सत्य वचन पर अडिग थे, इसलिए उन्होंने कन्या को गालव को लौटा दिया।   |   mahabharat अध्याय 5.117: दिवोदासका ययातिकन्या माधवीके गर्भसे प्रतर्दन नामक पुत्र उत्पन्न करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 117: दिवोदासका ययातिकन्या माधवीके गर्भसे प्रतर्दन नामक पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.117.21 
दिवोदासोऽथ धर्मात्मा समये गालवस्य ताम्।
कन्यां निर्यातयामास स्थित: सत्ये महीपति:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा राजा दिवोदास अपने सत्य वचन पर अडिग थे, इसलिए उन्होंने कन्या को गालव को लौटा दिया।
 
The virtuous king Divodāsa was firm on his promise of truth; therefore he returned the girl to Galava.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि गालवचरिते सप्तदशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें गालवचरित्रविषयक एक सौ सत्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)