श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 116: हर्यश्वका दो सौ श्यामकर्ण घोड़े देकर ययातिकन्याके गर्भसे वसुमना नामक पुत्र उत्पन्न करना और गालवका इस कन्याके साथ वहाँसे प्रस्थान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.116.7 
नारद उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो राजा हर्यश्व: काममोहित:।
उवाच गालवं दीनो राजर्षिऋषिसत्तमम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
नारदजी कहते हैं - ये वचन सुनकर राजर्षि महाराज हर्यश्व मुनिश्रेष्ठ गलवसे अत्यंत विनम्र होकर बोले -॥ 7॥
 
Naradji says - Hearing these words, Rajarshi Maharaj Haryashva Munishrestha Galvase became very humble and said - ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)