श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 116: हर्यश्वका दो सौ श्यामकर्ण घोड़े देकर ययातिकन्याके गर्भसे वसुमना नामक पुत्र उत्पन्न करना और गालवका इस कन्याके साथ वहाँसे प्रस्थान  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.116.22 
त्वय्येव तावत् तिष्ठन्तु हया इत्युक्तवान् द्विज:।
प्रययौ कन्यया सार्धं दिवोदासं प्रजेश्वरम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जाते समय ब्राह्मण ने राजा हर्यश्व से कहा, ‘महाराज, आपके द्वारा दिए गए दो सौ काले कान वाले घोड़े आपके पास जमानत के रूप में रहें।’ यह कहकर ऋषि गालव राजकुमारी के साथ राजा दिवोदास के यहां चले गए।
 
While leaving, the Brahmin said to King Haryashva, 'Maharaj, the two hundred black-eared horses given by you should remain with you as a deposit.' Saying this, sage Galav went to King Divodas' place along with the princess.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि गालवचरिते षोडशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें गालवचरित्रविषयक एक सौ सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११६॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल २४ श्लोक हैं।]
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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