श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 116: हर्यश्वका दो सौ श्यामकर्ण घोड़े देकर ययातिकन्याके गर्भसे वसुमना नामक पुत्र उत्पन्न करना और गालवका इस कन्याके साथ वहाँसे प्रस्थान  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.116.13 
क्रियतामुपसंहारो गुर्वर्थं द्विजसत्तम।
एषा तावन्मम प्रज्ञा यथा वा मन्यसे द्विज॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘विप्रवर! इस प्रकार आपको गुरुदक्षिणा के लिए धन एकत्रित करना चाहिए, ऐसा मेरा विश्वास है। फिर आप जैसा उचित समझें वैसा कर सकते हैं।’॥13॥
 
‘Vipravar! In this way you should collect money for Gurudakshina, this is my belief. Then you can do as you deem fit.’॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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