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mahabharat 5.115.6: मित्र! फिर भी मैं एक बात कहना चाहता हूँ। मैं अब उतना धनवान नहीं रहा जितना तुम मुझे समझते हो। मित्र! इन दिनों मेरी महिमा कम हो गई है॥6॥   |   mahabharat अध्याय 5.115: राजा ययातिका गालवको अपनी कन्या देना और गालवका उसे लेकर अयोध्यानरेशके यहाँ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 115: राजा ययातिका गालवको अपनी कन्या देना और गालवका उसे लेकर अयोध्यानरेशके यहाँ जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.115.6 
वक्तुमिच्छामि तु सखे यथा जानासि मां पुरा।
न तथा वित्तवानस्मि क्षीणं वित्तं च मे सखे॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मित्र! फिर भी मैं एक बात कहना चाहता हूँ। मैं अब उतना धनवान नहीं रहा जितना तुम मुझे समझते हो। मित्र! इन दिनों मेरी महिमा कम हो गई है॥6॥
 
Friend! Still I want to say one thing. I am no longer as wealthy as you think me to be. Friend! My glory has diminished these days.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)