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mahabharat 5.115.16: तत्पश्चात् गरुड़ ने भी गालव से विदा ली और कहा कि अब तुम घोड़े प्राप्त करने के लिए इस द्वार पर पहुँच गए हो, और अपने घर वापस चले गए।   |   mahabharat अध्याय 5.115: राजा ययातिका गालवको अपनी कन्या देना और गालवका उसे लेकर अयोध्यानरेशके यहाँ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 115: राजा ययातिका गालवको अपनी कन्या देना और गालवका उसे लेकर अयोध्यानरेशके यहाँ जाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.115.16 
उपलब्धमिदं द्वारमश्वानामिति चाण्डज:।
उक्त्वा गालवमापृच्छॺ जगाम भवनं स्वकम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् गरुड़ ने भी गालव से विदा ली और कहा कि अब तुम घोड़े प्राप्त करने के लिए इस द्वार पर पहुँच गए हो, और अपने घर वापस चले गए।
 
Thereafter Garuda too took leave from Galva saying that now you have attained this door to get the horses, he went back to his home.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)