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mahabharat 5.115.12: हे गालव! उसकी सुन्दरता से मोहित होकर देवता, मनुष्य और दानव सभी उसे पाने की इच्छा रखते हैं; अतः आप मेरी इस पुत्री को स्वीकार करें॥12॥   |   mahabharat अध्याय 5.115: राजा ययातिका गालवको अपनी कन्या देना और गालवका उसे लेकर अयोध्यानरेशके यहाँ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 115: राजा ययातिका गालवको अपनी कन्या देना और गालवका उसे लेकर अयोध्यानरेशके यहाँ जाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.115.12 
सदा देवमनुष्याणामसुराणां च गालव।
काङ्क्षिता रूपतो बाला सुता मे प्रतिगृह्यताम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे गालव! उसकी सुन्दरता से मोहित होकर देवता, मनुष्य और दानव सभी उसे पाने की इच्छा रखते हैं; अतः आप मेरी इस पुत्री को स्वीकार करें॥12॥
 
Gaalava! Attracted by her beauty, gods, humans and demons all desire to possess her; therefore, please accept this daughter of mine.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)