Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.115.10: जब कोई सज्जन पुरुष सहायता के लिए प्रार्थना करता है और निराश होकर असफल हो जाता है, तब वह मृतक के समान हो जाता है और उस धनवान पुरुष के पुत्र-पौत्रों को भी नष्ट कर देता है, जो उसका उपकार नहीं करता॥10॥   |   mahabharat अध्याय 5.115: राजा ययातिका गालवको अपनी कन्या देना और गालवका उसे लेकर अयोध्यानरेशके यहाँ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 115: राजा ययातिका गालवको अपनी कन्या देना और गालवका उसे लेकर अयोध्यानरेशके यहाँ जाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.115.10 
हताशो ह्यकृतार्थ: सन् हत: सम्भावितो नर:।
हिनस्ति तस्य पुत्रांश्च पौत्रांश्चाकुर्वतो हितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जब कोई सज्जन पुरुष सहायता के लिए प्रार्थना करता है और निराश होकर असफल हो जाता है, तब वह मृतक के समान हो जाता है और उस धनवान पुरुष के पुत्र-पौत्रों को भी नष्ट कर देता है, जो उसका उपकार नहीं करता॥10॥
 
When a noble man begs for help and fails in despair, he becomes like a dead person and destroys the sons and grandsons of the rich man who does not do good to him.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)