श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 114: गरुड़ और गालवका राजा ययातिके यहाँ जाकर गुरुको देनेके लिये श्यामकर्ण घोड़ोंकी याचना करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.114.20 
पात्रं प्रतिग्रहस्यायं दातुं पात्रं तथा भवान्।
शङ्खे क्षीरमिवासिक्तं भवत्वेतत् तथोपमम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यह गालव भिक्षा लेने के लिए उपयुक्त है और तुम भिक्षा देने के लिए श्रेष्ठ हो। जैसे शंख में दूध रखा जाता है, वैसे ही इसके हाथ में दी गई तुम्हारी भिक्षा भी शोभायमान होगी।॥20॥
 
‘This Galav is a suitable person to receive alms and you are the best person to give alms. Just like milk is kept in a conch, in the same way your alms will be beautiful when given in his hands.’॥ 20॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि गालवचरिते चतुर्दशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें गालव चरित्रविषयक एक सौ चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)