श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 114: गरुड़ और गालवका राजा ययातिके यहाँ जाकर गुरुको देनेके लिये श्यामकर्ण घोड़ोंकी याचना करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.114.11 
अयं मे नाहुष सखा गालवस्तपसो निधि:।
विश्वामित्रस्य शिष्योऽभूद् वर्षाण्ययुतशो नृप॥ ११॥
 
 
अनुवाद
नहुषानन्दन! ये तपोनिधि गालव मेरे मित्र हैं। राजन! वे दस हजार वर्षों तक महर्षि विश्वामित्र के शिष्य रहे हैं। 11।
 
Nahushanandan! This Taponidhi Galav is my friend. Rajan! He has been the disciple of Maharishi Vishwamitra for ten thousand years. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)