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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 113: ऋषभ पर्वतके शिखरपर महर्षि गालव और गरुड़की तपस्विनी शाण्डिलीसे भेंट तथा गरुड़ और गालवका गुरुदक्षिणा चुकानेके विषयमें परस्पर विचार
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श्लोक 21
श्लोक
5.113.21
प्रतीक्षिष्याम्यहं कालमेतावन्तं तथा परम्।
यथा संसिध्यते विप्र स मार्गस्तु निशाम्यताम्॥ २१॥
अनुवाद
मैं इतने समय तक तुम्हारी प्रतीक्षा करूँगा। हे ब्रह्मन्! तुम उस उपाय पर विचार करो जिससे तुम्हें सफलता मिल सके।॥21॥
I will wait for you for this much time. O Brahman! Think of the way in which you can get success.'॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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