Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.113.2: गरुड़ ने उन्हें प्रणाम किया और गलवान ने उनका आदर किया। तत्पश्चात, उन्होंने भी उन दोनों का स्वागत किया और उन्हें आसन पर बैठने को कहा। उनकी अनुमति पाकर वे दोनों वहीं आसन पर बैठ गए। | mahabharat अध्याय 5.113: ऋषभ पर्वतके शिखरपर महर्षि गालव और गरुड़की तपस्विनी शाण्डिलीसे भेंट तथा गरुड़ और गालवका गुरुदक्षिणा चुकानेके विषयमें परस्पर विचार । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अभिवाद्य सुपर्णस्तु गालवश्चाभिपूज्य ताम्।
तया च स्वागतेनोक्तौ विष्टरे संनिषीदतु:॥ २॥
अनुवाद
गरुड़ ने उन्हें प्रणाम किया और गलवान ने उनका आदर किया। तत्पश्चात, उन्होंने भी उन दोनों का स्वागत किया और उन्हें आसन पर बैठने को कहा। उनकी अनुमति पाकर वे दोनों वहीं आसन पर बैठ गए।
Garuda bowed to him and Galvan respected him. Thereafter he also welcomed both of them and asked them to sit on the seat. After getting his permission both of them sat there on the seat.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥