श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 113: ऋषभ पर्वतके शिखरपर महर्षि गालव और गरुड़की तपस्विनी शाण्डिलीसे भेंट तथा गरुड़ और गालवका गुरुदक्षिणा चुकानेके विषयमें परस्पर विचार  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.113.19 
विश्वामित्रोऽथ तं दृष्ट्वा गालवं चाध्वनि स्थित:।
उवाच वदतां श्रेष्ठो वैनतेयस्य संनिधौ॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उधर गालव को मार्ग में आते देख वक्ताओं में श्रेष्ठ विश्वामित्र खड़े हो गए और गरुड़ के पास जाकर उनसे इस प्रकार बोले-॥19॥
 
On the other side, seeing Galava coming on the road, Visvamitra, the best among orators, stood up and spoke to him near Garuda as follows:॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)