श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 113: ऋषभ पर्वतके शिखरपर महर्षि गालव और गरुड़की तपस्विनी शाण्डिलीसे भेंट तथा गरुड़ और गालवका गुरुदक्षिणा चुकानेके विषयमें परस्पर विचार  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.113.18 
अनुज्ञातस्तु शाण्डिल्या यथागतमुपागमत्।
नैव चासादयामास तथारूपांस्तुरंगमान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शाण्डिली की अनुमति लेकर वे जिस मार्ग से आये थे, उसी मार्ग से चले गये। गालव के कहे अनुसार उन्हें काले कान वाला घोड़ा नहीं मिला।
 
Thereafter taking Shandili's permission they left the same way they had come. They could not get the black-eared horse as told by Galava.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)