श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 113: ऋषभ पर्वतके शिखरपर महर्षि गालव और गरुड़की तपस्विनी शाण्डिलीसे भेंट तथा गरुड़ और गालवका गुरुदक्षिणा चुकानेके विषयमें परस्पर विचार  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.113.17 
भवितासि यथापूर्वं बलवीर्यसमन्वित:।
बभूवतुस्ततस्तस्य पक्षौ द्रविणवत्तरौ॥ १७॥
 
 
अनुवाद
"अब तुम पहले के समान शक्तिशाली और पराक्रमी हो जाओगे।" शाण्डिली के ऐसा कहते ही गरुड़ के पंख पहले से भी अधिक शक्तिशाली हो गये।
 
"Now you will be as powerful and valourous as before." As Shandili said this, Garuda's wings became even more powerful than before. 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)