Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.113.12: यह सुनकर तपस्विनी को बड़ा संतोष हुआ। उस समय उन्होंने पक्षीराज गरुड़ और महाबली ब्राह्मण गालव से कहा - 'सुपर्ण! तुम्हारे पंख और भी सुन्दर हो जाएँगे; इसलिए तुम्हें डरना नहीं चाहिए। अपनी घबराहट छोड़ दो॥ 12॥ | mahabharat अध्याय 5.113: ऋषभ पर्वतके शिखरपर महर्षि गालव और गरुड़की तपस्विनी शाण्डिलीसे भेंट तथा गरुड़ और गालवका गुरुदक्षिणा चुकानेके विषयमें परस्पर विचार । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह सुनकर तपस्विनी को बड़ा संतोष हुआ। उस समय उन्होंने पक्षीराज गरुड़ और महाबली ब्राह्मण गालव से कहा - 'सुपर्ण! तुम्हारे पंख और भी सुन्दर हो जाएँगे; इसलिए तुम्हें डरना नहीं चाहिए। अपनी घबराहट छोड़ दो॥ 12॥
Hearing this, the ascetic was very satisfied. At that time she said to the bird king Garuda and the great Brahmin Galav - 'Suparna! Your wings will become even more beautiful; therefore you should not be afraid. Leave your nervousness.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥