श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 113: ऋषभ पर्वतके शिखरपर महर्षि गालव और गरुड़की तपस्विनी शाण्डिलीसे भेंट तथा गरुड़ और गालवका गुरुदक्षिणा चुकानेके विषयमें परस्पर विचार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.113.1 
नारद उवाच
ऋषभस्य तत: शृङ्गं निपत्य द्विजपक्षिणौ।
शाण्डिलीं ब्राह्मणीं तत्र ददृशाते तपोऽन्विताम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
नारदजी कहते हैं: तत्पश्चात गालव और गरुड़जी ऋषभ पर्वत की चोटी पर उतरे और वहाँ तपस्वी ब्राह्मणी शाण्डिली को देखा।
 
Narada says: Thereafter Galava and Garuda descended to the peak of Rishabh mountain and saw the ascetic Brahmini Shandili there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)