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mahabharat 5.112.9: मैं मछलियों को, मछलियों को और मछलियों को देखता हूँ जिनके मुख आकार और आकृति में एक जैसे हैं, तथा साथ ही हाथी, घोड़े और मनुष्य के समान मुख वाले समुद्री जीवों को भी उन्मत्त होते हुए देखता हूँ ॥9॥   |   mahabharat अध्याय 5.112: गरुड़की पीठपर बैठकर पूर्व दिशाकी ओर जाते हुए गालवका उनके वेगसे व्याकुल होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 112: गरुड़की पीठपर बैठकर पूर्व दिशाकी ओर जाते हुए गालवका उनके वेगसे व्याकुल होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.112.9 
तुल्यरूपाननान् मत्स्यांस्तथा तिमितिमिंगिलान्।
नागाश्वनरवक्त्रांश्च पश्याम्युन्मथितानिव॥ ९॥
 
 
अनुवाद
मैं मछलियों को, मछलियों को और मछलियों को देखता हूँ जिनके मुख आकार और आकृति में एक जैसे हैं, तथा साथ ही हाथी, घोड़े और मनुष्य के समान मुख वाले समुद्री जीवों को भी उन्मत्त होते हुए देखता हूँ ॥9॥
 
I see fishes, fishes and fishes whose faces are similar in shape and size, as well as sea animals with faces like those of elephants, horses and humans, going mad. ॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)