श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 112: गरुड़की पीठपर बैठकर पूर्व दिशाकी ओर जाते हुए गालवका उनके वेगसे व्याकुल होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.112.8 
समीननागनक्रं च खमिवारोप्यते जलम्।
वायुना चैव महता पक्षवातेन चानिशम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
आपके पंखों की गति से निरन्तर उठने वाली प्रचण्ड वायु के वेग से मछलियों, घोड़ों और मगरमच्छों सहित समुद्र का जल मानो आकाश में उछाला जा रहा है। ॥8॥
 
The water of the ocean, including the fishes, seahorses and crocodiles, is as if tossed into the sky by you, with the force of the strong wind that rises continuously due to the movement of your wings. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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