श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 112: गरुड़की पीठपर बैठकर पूर्व दिशाकी ओर जाते हुए गालवका उनके वेगसे व्याकुल होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.112.4 
नारद उवाच
तमाह विनतासूनुरारोहस्वेति वै द्विजम्।
आरुरोहाथ स मुनिर्गरुडं गालवस्तदा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
नारद कहते हैं: तब विनीतानंद गरुड़ ने महान ब्राह्मण गालव से कहा, 'मेरे ऊपर चढ़ो।' तब गालव ऋषि गरुड़ की पीठ पर बैठ गये।
 
Narada says: Then Vinatarananda Garuda said to the great Brahmin Galav, 'Climb upon me.' Then sage Galav sat on Garud's back.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas