श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 112: गरुड़की पीठपर बैठकर पूर्व दिशाकी ओर जाते हुए गालवका उनके वेगसे व्याकुल होना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.112.20 
नातिप्रज्ञोऽसि विप्रर्षे योऽऽत्मानं त्यक्तुमिच्छसि।
न चापि कृत्रिम: काल: कालो हि परमेश्वर:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मर्षे! यदि तुम प्राण त्यागना चाहते हो तो तुम बहुत बुद्धिमान नहीं हो; क्योंकि मृत्यु कृत्रिम नहीं है (अपनी इच्छा से उत्पन्न नहीं हो सकती)। वह तो भगवान् का स्वरूप है॥20॥
 
Brahmarshe! If you want to sacrifice your life then you are not very intelligent; Because death is not artificial (it cannot be created by one's own will). He is the form of God. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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