श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 112: गरुड़की पीठपर बैठकर पूर्व दिशाकी ओर जाते हुए गालवका उनके वेगसे व्याकुल होना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.112.19 
नारद उवाच
एवं बहु च दीनं च ब्रुवाणं गालवं तदा।
प्रत्युवाच व्रजन्नेव प्रहसन् विनतात्मज:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
नारदजी कहते हैं: महर्षि गालव से ये विनम्र वचन कहकर विनतानंदन गरुड़जी ने चलते समय उनसे मुस्कुराते हुए कहा:॥19॥
 
Narada says: After speaking these humble words to Maharishi Galava, Vinatanandan Garuda smiled and said to him while walking:॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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