श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 112: गरुड़की पीठपर बैठकर पूर्व दिशाकी ओर जाते हुए गालवका उनके वेगसे व्याकुल होना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.112.17 
तेषां चैवापवर्गाय मार्गं पश्यामि नाण्डज।
ततोऽयं जीवितत्यागे दृष्टो मार्गो मयाऽऽत्मन:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
परंतु अण्डज! मुझे उन घोड़ों को त्यागने का कोई उपाय नहीं दिखाई देता। इसीलिए मैंने अपने प्राण त्यागने का मार्ग चुन लिया है ॥17॥
 
But Andaj! I do not see any way to give up those horses. That is why I have chosen the path of abandoning my life. ॥17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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