श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 112: गरुड़की पीठपर बैठकर पूर्व दिशाकी ओर जाते हुए गालवका उनके वेगसे व्याकुल होना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.112.16 
गुरवे संश्रुतानीह शतान्यष्टौ हि वाजिनाम्।
एकत: श्यामकर्णानां शुभ्राणां चन्द्रवर्चसाम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मैंने गुरु को आठ सौ घोड़े देने की प्रतिज्ञा की है, जो चंद्रमा के समान उज्ज्वल हैं और जिनके कान एक ओर से काले रंग के हैं॥16॥
 
I have pledged to give the Guru eight hundred horses which are as bright as the moon and whose ears are black in colour from one side.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)