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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 112: गरुड़की पीठपर बैठकर पूर्व दिशाकी ओर जाते हुए गालवका उनके वेगसे व्याकुल होना
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श्लोक 15
श्लोक
5.112.15
न मे प्रयोजनं किंचिद् गमने पन्नगाशन।
संनिवर्त महाभाग न वेगं विषहामि ते॥ १५॥
अनुवाद
गरुड़! इस यात्रा में मेरा कोई उपयोग नहीं है, अतः लौट जाओ। हे महाभाग! मैं तुम्हारा वेग सहन नहीं कर सकता।
Garuda! I have no use in this journey, so return. O great one! I cannot bear your speed. 15.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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