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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 112: गरुड़की पीठपर बैठकर पूर्व दिशाकी ओर जाते हुए गालवका उनके वेगसे व्याकुल होना
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श्लोक 13
श्लोक
5.112.13
शरीरं तु न पश्यामि तव चैवात्मनश्च ह।
पदे पदे तु पश्यामि शरीरादग्निमुत्थितम्॥ १३॥
अनुवाद
मैं न तो तुम्हारा शरीर देखता हूँ, न अपना। मैं तो पग-पग पर तुम्हारे शरीर से उठती हुई ज्वालाएँ देखता हूँ॥13॥
I neither see your body nor my own. I see flames rising from your body at every step.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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