श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 112: गरुड़की पीठपर बैठकर पूर्व दिशाकी ओर जाते हुए गालवका उनके वेगसे व्याकुल होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.112.12 
तम एव तु पश्यामि शरीरं ते न लक्षये।
मणीव जात्यौ पश्यामि चक्षुषी तेऽहमण्डज॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मैं केवल अंधकार ही देख सकता हूँ। मैं आपका शरीर नहीं देख सकता। हे अण्डज! आपके दोनों नेत्र मुझे दो बहुमूल्य रत्नों के समान चमकते हुए प्रतीत हो रहे हैं॥12॥
 
I can only see darkness. I cannot see your body. O Andaja! Your two eyes appear to me shining like two precious gems.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)