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श्लोक 5.112.10  |
महार्णवस्य च रवै: श्रोत्रे मे बधिरे कृते।
न शृणोमि न पश्यामि नात्मनो वेद्मि कारणम्॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| समुद्र की इन भयंकर गर्जनाओं ने मेरे कान बहरे कर दिए हैं। मैं न तो सुन पा रहा हूँ, न देख पा रहा हूँ और न ही अपनी रक्षा का कोई उपाय समझ पा रहा हूँ॥10॥ |
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| These terrifying roars of the ocean have deafened my ears. I am unable to hear, see or understand any means of saving myself.॥10॥ |
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