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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 112: गरुड़की पीठपर बैठकर पूर्व दिशाकी ओर जाते हुए गालवका उनके वेगसे व्याकुल होना
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श्लोक 10
श्लोक
5.112.10
महार्णवस्य च रवै: श्रोत्रे मे बधिरे कृते।
न शृणोमि न पश्यामि नात्मनो वेद्मि कारणम्॥ १०॥
अनुवाद
समुद्र की इन भयंकर गर्जनाओं ने मेरे कान बहरे कर दिए हैं। मैं न तो सुन पा रहा हूँ, न देख पा रहा हूँ और न ही अपनी रक्षा का कोई उपाय समझ पा रहा हूँ॥10॥
These terrifying roars of the ocean have deafened my ears. I am unable to hear, see or understand any means of saving myself.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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