गालवन ने कहा - गरुत्मान! भुजगराजशत्रो! सुपर्ण! विनतानंदन! तार्क्ष्य! आप मुझे पूर्व दिशा की ओर ले चलें, जहाँ सूर्य और चन्द्रमा धर्म के नेत्रों के समान चमकते हैं॥1॥
Galavan said – Garutman! Bhujgarajshatro! Suparn! Vintanandan! Tarkshya! You take me towards the east, where the sun and the moon shine as the eyes of religion. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥