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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 111: उत्तर दिशाका वर्णन
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श्लोक 4
श्लोक
5.111.4
अत्र नारायण: कृष्णो जिष्णुश्चैव नरोत्तम:।
बदर्यामाश्रमपदे तथा ब्रह्मा च शाश्वत:॥ ४॥
अनुवाद
इसी दिशा में बदरिका आश्रमतीर्थ है, जहाँ सच्चिदानन्दस्वरूप श्री नारायण, विजयी पुरुष और सनातन ब्रह्माजी निवास करते हैं॥4॥
In this direction is Badarika Ashramtirtha, where Shri Narayana in the form of Sachchidananda, the victorious male and the eternal Brahmaji reside. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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