श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 111: उत्तर दिशाका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.111.28 
उद्यतोऽहं द्विजश्रेष्ठ तव दर्शयितुं दिश:।
पृथिवीं चाखिलां ब्रह्मंस्तस्मादारोह मां द्विज॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मैं तुम्हें सम्पूर्ण पृथ्वी और सम्पूर्ण दिशाएँ दिखाने के लिए तैयार हूँ; अतः तुम मेरी पीठ पर बैठो।
 
O best of Brahmins! I am ready to show you the whole earth and all directions; therefore, please sit on my back.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि गालवचरिते एकादशाधिकशततमोऽध्याय:॥ १११॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें गालवचरित्रविषयक एक सौ ग्यारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १११॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)