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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 111: उत्तर दिशाका वर्णन
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श्लोक 25-26h
श्लोक
5.111.25-26h
अत्र नित्यं दिशाम्पाला: सायम्प्रातर्द्विजर्षभ॥ २५॥
कस्य कार्यं किमिति वै परिक्रोशन्ति गालव।
अनुवाद
हे श्रेष्ठ ब्राह्मण गालव! प्रतिदिन प्रातः और सायंकाल सभी दिक्पाल यहाँ एकत्रित होकर ऊँची आवाज में पूछते हैं कि किसको क्या काम है॥25 1/2॥
O great Brahmin Galav! Every day in the morning and evening all the Dikpalas assemble here and ask in a loud voice who has what work to do.॥ 25 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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