Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.111.13-14h: यहाँ हरी घास से सुशोभित केले का वन है और यहाँ कल्पवृक्ष (पूजनीय वृक्ष) पाए जाते हैं। गालव! इस दिशा में सुखों से परिपूर्ण तथा सदा संयम और अनुशासन का पालन करने वाले मुक्तात्मा सिद्धों की इच्छानुसार विमान विचरण करते हैं। 13 1/2।   |   mahabharat अध्याय 5.111: उत्तर दिशाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 111: उत्तर दिशाका वर्णन  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  5.111.13-14h 
शाद्वलं कदलीस्कन्धमत्र संतानका नगा:।
अत्र संयमनित्यानां सिद्धानां स्वैरचारिणाम्॥ १३॥
विमानान्यनुरूपाणि कामभोग्यानि गालव।
 
 
अनुवाद
यहाँ हरी घास से सुशोभित केले का वन है और यहाँ कल्पवृक्ष (पूजनीय वृक्ष) पाए जाते हैं। गालव! इस दिशा में सुखों से परिपूर्ण तथा सदा संयम और अनुशासन का पालन करने वाले मुक्तात्मा सिद्धों की इच्छानुसार विमान विचरण करते हैं। 13 1/2।
 
Here is the banana forest decorated with green grass and here the Kalpavrikshas (worshipful trees) are found. Galav! In this direction, the planes full of pleasures and as per the wishes of the free-spirited Siddhas who always follow discipline and self-control, roam. 13 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)