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mahabharat 5.111.12: द्विजश्रेष्ठ! यहीं पर मंदाकिनी नदी और मंदराचल है। इस दिशा में राक्षस सौगंधिकवन की रक्षा करते हैं। 12॥   |   mahabharat अध्याय 5.111: उत्तर दिशाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 111: उत्तर दिशाका वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.111.12 
अत्र मन्दाकिनी चैव मन्दरश्च द्विजर्षभ।
अत्र सौगन्धिकवनं नैर्ऋतैरभिरक्ष्यते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! यहीं पर मंदाकिनी नदी और मंदराचल है। इस दिशा में राक्षस सौगंधिकवन की रक्षा करते हैं। 12॥
 
Dwijshreshtha! This is where Mandakini river and Mandarachal are. In this direction the demons protect Saugandhikvan. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)