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mahabharat 5.111.10-11: गालव! इसी दिशा में धन-धान्य के दाता कुबेर कैलाश पर्वत पर दैत्यों, यक्षों और गंधर्वों पर शासन करने के लिए प्रतिष्ठित हुए थे। उत्तर दिशा में रमणीय चैत्ररथवन और वैखानस ऋषियों का आश्रम है। 10-11॥   |   mahabharat अध्याय 5.111: उत्तर दिशाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 111: उत्तर दिशाका वर्णन  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  5.111.10-11 
अत्र राक्षसयक्षाणां गन्धर्वाणां च गालव॥ १०॥
आधिपत्येन कैलासे धनदोऽप्यभिषेचित:।
अत्र चैत्ररथं रम्यमत्र वैखानसाश्रम:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
गालव! इसी दिशा में धन-धान्य के दाता कुबेर कैलाश पर्वत पर दैत्यों, यक्षों और गंधर्वों पर शासन करने के लिए प्रतिष्ठित हुए थे। उत्तर दिशा में रमणीय चैत्ररथवन और वैखानस ऋषियों का आश्रम है। 10-11॥
 
Galav! In this direction, Kubera, the giver of wealth, was consecrated to dominate the demons, Yakshas and Gandharvas on Mount Kailash. In the north direction is the delightful Chaitrarathvan and the ashram of Vaikhanas sages. 10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)