अत्र देवीं दितिं सुप्तामात्मप्रसवधारिणीम्।
विगर्भामकरोच्छक्रो यत्र जातो मरुद्गण:॥ ८॥
अनुवाद
इसी दिशा में देवराज इन्द्र ने सोई हुई गर्भवती दिति देवी का गर्भ (उनके उदर में प्रवेश करके) निकाल दिया था, जिससे मरुद्गण उत्पन्न हुए थे॥8॥
In this direction, Devraj Indra had removed the womb of the sleeping pregnant Diti Devi (by entering her abdomen), due to which the Marudganas were born. 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥