श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 110: पश्चिमदिशाका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.110.7 
अतो रात्रिश्च निद्रा च निर्गता दिवसक्षये।
जायते जीवलोकस्य हर्तुमर्धमिवायुष:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
इस दिशा से दिन के अंत में रात्रि और निद्रा, प्राणी जगत की आधी आयु हर लेती हुई प्रतीत होती हैं ॥7॥
 
From this direction, at the end of the day, night and sleep appear to take away half the life of the living world. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)