एष ते पश्चिमो मार्गो दिग्द्वारेण प्रकीर्तित:।
ब्रूहि गालव गच्छावो बुद्धि: का द्विजसत्तम॥ २०॥
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ गालव! इस प्रकार मैंने तुम्हें पश्चिम दिशा का मार्ग संक्षेप में बताया। अब बताओ, तुम्हारी क्या राय है? हम दोनों को किस दिशा में जाना चाहिए?॥20॥
O best of Brahmins, Galava! Thus I have briefly told you the way to the west. Now tell me, what is your opinion? In which direction should we both go?॥20॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि गालवचरिते दशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें गालवचरित्रविषयक एक सौ दसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥