श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 110: पश्चिमदिशाका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.110.19 
अत्रानलसखस्यापि पवनस्य निवेशनम्।
महर्षे: कश्यपस्यात्र मारीचस्य निवेशनम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इसी दिशा में अग्निदेव के मित्र वायुदेव का घर और मरीचिनंदन महर्षि कश्यप का आश्रम है ॥19॥
 
In this direction is the house of Vayudev, the friend of Agnidev, and the ashram of Marichinandan Maharishi Kashyap. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)