श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 110: पश्चिमदिशाका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.110.17 
अत्र नित्यं स्रवन्तीनां प्रभव: सागरोदय:।
अत्र लोकत्रयस्यापस्तिष्ठन्ति वरुणालये॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अधिकांश नदियाँ इसी दिशा से निकली हैं, जिनके जल से समुद्र भरे रहते हैं। यहाँ के वरुणालय में तीनों लोकों के लिए उपयोगी जल विद्यमान है॥17॥
 
Most of the rivers have originated from this direction, whose waters keep the oceans full. The Varunalaya here contains the water that is useful for the three worlds.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)