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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 110: पश्चिमदिशाका वर्णन
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श्लोक 15
श्लोक
5.110.15
अत:प्रभृति सूर्यस्य तिर्यगावर्तते गति:।
अत्र ज्योतींषि सर्वाणि विशन्त्यादित्यमण्डलम्॥ १५॥
अनुवाद
इसी दिशा से सूर्यदेव तिरछी गति से घूमना प्रारंभ करते हैं। यहीं से सारा प्रकाश सौरमंडल में प्रवेश करता है॥15॥
It is from this direction that the Sun God begins to revolve in an oblique motion. It is here that all the light enters the solar system.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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