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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 110: पश्चिमदिशाका वर्णन
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श्लोक 13
श्लोक
5.110.13
अत्र ध्वजवती नाम कुमारी हरिमेधस:।
आकाशे तिष्ठ तिष्ठेति तस्थौ सूर्यस्य शासनात्॥ १३॥
अनुवाद
इस दिशा में हरिमेध ऋषि की पुत्री ध्वजवती रहती है, जो सूर्यदेव की आज्ञा से आकाश में स्थित है - ‘रुको, रुको।’ ॥13॥
In this direction lives the daughter of sage Harimedha, Dhwajvati, who is situated in the sky due to the command of the Sun god, ‘Wait, wait.’ ॥13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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