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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 110: पश्चिमदिशाका वर्णन
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श्लोक 11
श्लोक
5.110.11
अत्र मध्ये समुद्रस्य कबन्ध: प्रतिदृश्यते।
स्वर्भानो: सूर्यकल्पस्य सोमसूर्यौ जिघांसत:॥ ११॥
अनुवाद
पश्चिम दिशा में समुद्र के भीतर सूर्य के समान चमकने वाले राहु का धड़ दिखाई देता है, जो सूर्य और चन्द्रमा को मारने की इच्छा रखता है ॥11॥
In the west, within the ocean, the torso of Rahu, shining like the Sun, can be seen who desires to kill the Sun and the Moon. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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