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mahabharat 5.11.4: मैं दुर्बल हूँ, मुझमें तुम सबकी रक्षा करने की शक्ति नहीं है। बलवान पुरुष ही राजा बनता है। केवल इन्द्र में ही अनन्त शक्ति है।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 5.11: देवताओं तथा ऋषियोंके अनुरोधसे राजा नहुषका इन्द्रके पदपर अभिषिक्त होना एवं काम-भोगमें आसक्त होना और चिन्तामें पड़ी हुई इन्द्राणीको बृहस्पतिका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 11: देवताओं तथा ऋषियोंके अनुरोधसे राजा नहुषका इन्द्रके पदपर अभिषिक्त होना एवं काम-भोगमें आसक्त होना और चिन्तामें पड़ी हुई इन्द्राणीको बृहस्पतिका आश्वासन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.11.4 
दुर्बलोऽहं न मे शक्तिर्भवतां परिपालने।
बलवाञ्जायते राजा बलं शक्रे हि नित्यदा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मैं दुर्बल हूँ, मुझमें तुम सबकी रक्षा करने की शक्ति नहीं है। बलवान पुरुष ही राजा बनता है। केवल इन्द्र में ही अनन्त शक्ति है।॥4॥
 
I am weak, I do not have the power to protect you all. Only a strong man becomes a king. Only Indra has the eternal power of power.'॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)