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mahabharat 5.11.17-19h: उन्हें देखकर दुष्टात्मा नहुष ने सभा में उपस्थित सभी लोगों से कहा, 'इन्द्र की रानी शची मेरी सेवा में क्यों नहीं आतीं? मैं देवताओं का इन्द्र और समस्त लोकों का स्वामी हूँ। अतः शची देवी आज शीघ्र ही मेरे महल में आएँ।'॥17-18 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.11: देवताओं तथा ऋषियोंके अनुरोधसे राजा नहुषका इन्द्रके पदपर अभिषिक्त होना एवं काम-भोगमें आसक्त होना और चिन्तामें पड़ी हुई इन्द्राणीको बृहस्पतिका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 11: देवताओं तथा ऋषियोंके अनुरोधसे राजा नहुषका इन्द्रके पदपर अभिषिक्त होना एवं काम-भोगमें आसक्त होना और चिन्तामें पड़ी हुई इन्द्राणीको बृहस्पतिका आश्वासन  »  श्लोक 17-19h
 
 
श्लोक  5.11.17-19h 
स तां संदृश्य दुष्टात्मा प्राह सर्वान् सभासद:॥ १७॥
इन्द्रस्य महिषी देवी कस्मान्मां नोपतिष्ठति।
अहमिन्द्रोऽस्मि देवानां लोकानां च तथेश्वर:॥ १८॥
आगच्छतु शची मह्यं क्षिप्रमद्य निवेशनम्।
 
 
अनुवाद
उन्हें देखकर दुष्टात्मा नहुष ने सभा में उपस्थित सभी लोगों से कहा, 'इन्द्र की रानी शची मेरी सेवा में क्यों नहीं आतीं? मैं देवताओं का इन्द्र और समस्त लोकों का स्वामी हूँ। अतः शची देवी आज शीघ्र ही मेरे महल में आएँ।'॥17-18 1/2॥
 
On seeing them, the evil-spirited Nahusha said to all the members of the assembly, 'Why does Indra's queen Shachi not present herself to serve me? I am the Indra of the gods and the lord of all the worlds. Therefore, Shachi Devi should come to my palace quickly today.'॥ 17-18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)