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mahabharat 5.11.15: विश्वावसु, नारद, गन्धर्व और अप्सराओं का समुदाय तथा छहों ऋतुएँ शरीर रूप में देवेन्द्र की सेवा में उपस्थित थीं ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 5.11: देवताओं तथा ऋषियोंके अनुरोधसे राजा नहुषका इन्द्रके पदपर अभिषिक्त होना एवं काम-भोगमें आसक्त होना और चिन्तामें पड़ी हुई इन्द्राणीको बृहस्पतिका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 11: देवताओं तथा ऋषियोंके अनुरोधसे राजा नहुषका इन्द्रके पदपर अभिषिक्त होना एवं काम-भोगमें आसक्त होना और चिन्तामें पड़ी हुई इन्द्राणीको बृहस्पतिका आश्वासन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.11.15 
विश्वावसुर्नारदश्च गन्धर्वाप्सरसां गणा:।
ऋतव: षट् च देवेन्द्रं मूर्तिमन्त उपस्थिता:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
विश्वावसु, नारद, गन्धर्व और अप्सराओं का समुदाय तथा छहों ऋतुएँ शरीर रूप में देवेन्द्र की सेवा में उपस्थित थीं ॥15॥
 
Vishvavasu, Narad, the community of Gandharvas and Apsaras and the six seasons were present in the service of Devendra in the form of bodies. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)