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mahabharat 5.11.10-11h: धर्म को सर्वोपरि रखते हुए राजा नहुष उस समय सम्पूर्ण जगत के अधिपति हो गए। दुर्लभ वर पाकर तथा स्वर्ग का राज्य पाकर भी वे धर्मपरायण रहते हुए भी विषय-भोगों में आसक्त हो गए। 10 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.11: देवताओं तथा ऋषियोंके अनुरोधसे राजा नहुषका इन्द्रके पदपर अभिषिक्त होना एवं काम-भोगमें आसक्त होना और चिन्तामें पड़ी हुई इन्द्राणीको बृहस्पतिका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 11: देवताओं तथा ऋषियोंके अनुरोधसे राजा नहुषका इन्द्रके पदपर अभिषिक्त होना एवं काम-भोगमें आसक्त होना और चिन्तामें पड़ी हुई इन्द्राणीको बृहस्पतिका आश्वासन  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  5.11.10-11h 
धर्मं पुरस्कृत्य तदा सर्वलोकाधिपोऽभवत्।
सुदुर्लभं वरं लब्ध्वा प्राप्य राज्यं त्रिविष्टपे॥ १०॥
धर्मात्मा सततं भूत्वा कामात्मा समपद्यत।
 
 
अनुवाद
धर्म को सर्वोपरि रखते हुए राजा नहुष उस समय सम्पूर्ण जगत के अधिपति हो गए। दुर्लभ वर पाकर तथा स्वर्ग का राज्य पाकर भी वे धर्मपरायण रहते हुए भी विषय-भोगों में आसक्त हो गए। 10 1/2॥
 
Keeping religion at the forefront, King Nahusha at that time became the ruler of the entire world. After getting the rarest boon and attaining the kingdom of heaven, he became attached to sexual pleasures even though he remained devout. 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)