Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.11.1-2h: शल्य कहते हैं- युधिष्ठिर! इस प्रकार (स्वर्ग में कोलाहल मच जाने पर) ऋषियों, समस्त देवताओं और देवगणों ने मिलकर कहा- 'इन श्री नहुष का देवताओं के राजा के रूप में अभिषेक किया जाए; क्योंकि ये तेजस्वी, यशस्वी और सदैव धर्म में लगे रहने वाले हैं।' | mahabharat अध्याय 5.11: देवताओं तथा ऋषियोंके अनुरोधसे राजा नहुषका इन्द्रके पदपर अभिषिक्त होना एवं काम-भोगमें आसक्त होना और चिन्तामें पड़ी हुई इन्द्राणीको बृहस्पतिका आश्वासन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शल्य उवाच
ऋषयोऽथाब्रुवन् सर्वे देवाश्च त्रिदिवेश्वरा:।
अयं वै नहुष: श्रीमान् देवराज्येऽभिषिच्यताम्॥ १॥
तेजस्वी च यशस्वी च धार्मिकश्चैव नित्यदा।
अनुवाद
शल्य कहते हैं- युधिष्ठिर! इस प्रकार (स्वर्ग में कोलाहल मच जाने पर) ऋषियों, समस्त देवताओं और देवगणों ने मिलकर कहा- 'इन श्री नहुष का देवताओं के राजा के रूप में अभिषेक किया जाए; क्योंकि ये तेजस्वी, यशस्वी और सदैव धर्म में लगे रहने वाले हैं।'
Shalya says- Yudhishthir! In this way (after there was chaos in heaven) the sages, all the gods and deities together said - 'Let this Mr. Nahush be anointed as the king of gods; Because they are bright, successful and always engaged in religion. 1 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥