Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.109.21: गालव! तुम मेरी सेवा के योग्य हो, इसलिए मैंने तुम्हें यह दक्षिण मार्ग बताया है; यदि तुम इस दिशा में जाना चाहते हो तो मुझे बताओ अथवा अब तीसरी दिशा अर्थात पश्चिम का वर्णन सुनो। | mahabharat अध्याय 5.109: दक्षिणदिशाका वर्णन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एष तस्यापि ते मार्ग: परिचार्यस्य गालव।
ब्रूहि मे यदि गन्तव्यं प्रतीचीं शृणु चापराम्॥ २१॥
अनुवाद
गालव! तुम मेरी सेवा के योग्य हो, इसलिए मैंने तुम्हें यह दक्षिण मार्ग बताया है; यदि तुम इस दिशा में जाना चाहते हो तो मुझे बताओ अथवा अब तीसरी दिशा अर्थात पश्चिम का वर्णन सुनो।
Galava! You are worthy of being served by me, therefore I have shown you this southern route; if you want to go in this direction then tell me or now listen to the description of the third direction, the west.
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि गालवचरिते नवाधिकशततमोऽध्याय:॥ १०९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें गालवचरित्रविषयक एक सौ नौवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥