श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 109: दक्षिणदिशाका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.109.11 
अत्र सावर्णिना चैव यवक्रीतात्मजेन च।
मर्यादा स्थापिता ब्रह्मन् यां सूर्यो नातिवर्तते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! इस दिशा में सावर्णि मनु और यवक्रीत के पुत्र ने सूर्य की गति के लिए एक सीमा (मर्यादा) निर्धारित की थी, जिसका सूर्यदेव कभी उल्लंघन नहीं करते।
 
Brahman! In this direction, Savarni Manu and Yavakrit's son had established a limit (limit) for the movement of the Sun, which the Sun God never violates.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)